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गरियाबंद। जिला पंचायत गरियाबंद की पूर्व अध्यक्ष स्मृति ठाकुर ने नकटी गांव में मकानों को हटाने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बेघर करना बेहद संवेदनहीन कदम है।

स्मृति ठाकुर ने कहा कि इस मामले को महिला आयोग, बाल आयोग और मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया जाएगा। उनका आरोप है कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए प्रशासन ने कार्रवाई की, जिससे कई लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार बनने के बाद से आम जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, विधायक आवास परियोजना के नाम पर गरीबों के आशियानों को बुलडोजर से हटाया गया, जबकि प्रभावित परिवारों की समस्याओं और बच्चों की स्थिति पर पर्याप्त संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।

पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि वर्षा ऋतु में लोगों को बेघर करने का निर्णय मानवीय दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सरकार पर गरीब, किसान, मजदूर और आदिवासी हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता इस मुद्दे को याद रखेगी और समय आने पर अपना निर्णय देगी।

हालांकि, इस मामले में प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक पक्ष इस समाचार के प्रकाशन तक सामने नहीं आया है। यदि सरकार या प्रशासन की प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।