Spread the love

FIR सिर्फ छत्तीसगढ़ मार्केटिंग फेडरेशन तक सीमित? नागरिक आपूर्ति निगम की चावल अफरा-तफरी पर कार्रवाई कब?

 

हाल ही में छत्तीसगढ़ मार्केटिंग फेडरेशन से जुड़े मामलों में प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की गई और दोषियों को सज़ा भी दिलाई गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यदि इच्छाशक्ति हो तो कानून तुरंत अपना काम करता है।

 

लेकिन इसके ठीक उलट छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (नागरिक आपूर्ति निगम) से जुड़े चावल की अफरा-तफरी के गंभीर प्रकरण में अब तक न तो FIR दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई की गई है, जबकि मामला पंचनामा सहित स्पष्ट रूप से दर्ज है।

कोंडागांव जिले में दिनांक 7 अगस्त 2025 को सामने आए इस प्रकरण में जाँच के दौरान असलम खान(उस समय कोंडागांव में कनिष्ठ सहायक) तथा सतीश वर्मा (प्लेसमेंट क्वालिटी इंस्पेक्टर, कोंडागांव) को दोषी पाया गया।

 

पंचनामा के अनुसार, एक फेल चावल लॉट को कागज़ों में लॉट नंबर बदलकर पास दर्शाया गया और उसे दूसरे ग्राम में वितरण हेतु चढ़ा दिया गया, जो कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत गंभीर व दंडनीय अपराध है।

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, असलम खान पिछले लगभग 14 वर्षों से क्षेत्र में पदस्थ है और उसके कार्यकाल के दौरान चावल की अफरा-तफरी व अन्य अवैधानिक गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। आरोप है कि लंबे समय से एक ही क्षेत्र में बने रहने के कारण उसने व्यवस्था पर प्रभाव स्थापित कर लिया, जिसके चलते कार्रवाई हर बार टलती रही।

सूत्रों का यह भी आरोप है कि असलम खान को स्थानीय नागरिक आपूर्ति निगम की जिला प्रबंधक (DM), अंजना एक्का, का संरक्षण प्राप्त है। बताया जाता है कि अंजना एक्का हाल ही में स्टेनो पद से पदोन्नत होकर DM बनी हैं और उन्हें नागरिक आपूर्ति निगम के जमीनी कामकाज व व्यावहारिक कठिनाइयों का पर्याप्त अनुभव नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी संरक्षण के चलते मामला अब तक FIR के स्तर तक नहीं पहुँच पाया है।

 

इन हालातों में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब मार्केटिंग फेडरेशन के मामलों में बिना देरी FIR और सज़ा संभव है, तो नागरिक आपूर्ति निगम की चावल की अफरा-तफरी में दोषियों को बचाने जैसा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?

क्या यह दोहरा मापदंड नहीं है?

और क्या आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को जानबूझकर हल्का किया जा रहा है?

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले में तत्काल FIR दर्ज कर निष्पक्ष जाँच, तथा संरक्षण देने के आरोपों की भी स्वतंत्र जाँच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के विरुद्ध शांति, इंसाफ़ और मानवता की सामूहिक आवाज़