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नेताओं ने कहा—महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं तक सीमित, जमीनी बदलाव जरूरी

रायपुर, 19 अप्रैल 2026।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार को घेरते हुए इसके लागू होने में देरी का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार ने कानून पारित तो किया, लेकिन इसे अमल में लाने के लिए अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण कानून के जरिए 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने की बात कही गई थी, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर टाल दिया गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट होती तो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती थीं।

वहीं, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष मिथलेश बघेल ने पंचायत स्तर का उदाहरण देते हुए कहा कि कई स्थानों पर महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके परिजन निर्णय लेते हैं, जिसे आम बोलचाल में “प्रधान पति” मॉडल कहा जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि यही स्थिति बड़े स्तर पर भी देखने को मिल सकती है, जहां प्रतिनिधित्व महिलाओं के नाम पर होगा लेकिन नियंत्रण पुरुषों के हाथ में रहेगा।

मिथलेश बघेल ने महिला सुरक्षा के मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसंख्या और सीटों के आधार पर होने वाले बदलाव से क्षेत्रीय असंतुलन भी बढ़ सकता है।

पार्टी नेताओं ने कहा कि भावनात्मक मुद्दों के बजाय ठोस सुधारों पर ध्यान देने की जरूरत है और महिला सशक्तिकरण को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।