दुर्ग में UPSC टॉपर्स ने दिन को बनाया ऐतिहासिक: छत्तीसगढ़ में पहली बार एक मंच पर आकर 5 UPSC टॉपर्स ने दिए टिप्स, जिला प्रशासन के वर्कशॉप में टॉपर्स को सुनने पहुंचे क्षमता से ज्यादा स्टूडेंट्स, बरामदे में लगानी पड़ी और कुर्सी…क्या-कुछ कहा, पढ़िए खबर…

भिलाई। छत्तीसगढ़ के इतिहास में आज पहली बार यूपीएससी के पांच टॉपर्स एक मंच पर इकट्‌ठा होकर सफलता के टिप्स दे रहे थे। दुर्ग जिला प्रशासन की ओर से वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप का क्रेज इतना कि बीआईटी दुर्ग के ऑडिटोरियम में जितने छात्र पहुंचे थे, उतने ही छात्र बाहर थे। उनके लिए अलग से एलईडी लगाकर कुर्सी लगाई गई। ताकि सभी बच्चे सीधे इंट्रैक्ट हो सके।

टॉपर्स ने कहा, यूपीएससी में चयन के लिए जगह की बाधा नहीं होती। रायपुर से पढ़कर भी सलेक्शन होता है। बिना कोचिंग के भी सलेक्शन होता है। हिंदी मीडियम से भी सलेक्शन होता है और इसके लिए जरूरी नहीं कि सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं से आपने पढ़ाई की हो। दुर्ग में पांच टापर्स जुटे और सब अलग-अलग एजुकेशन फील्ड थे, सबने कहा कि अपने पसंद का सबजेक्ट चुनो और खूब पढ़ो। टापर श्रद्धा शुक्ला ने कहा कि वो रायपुर से हैं उन्होंने कोचिंग नहीं ली और मौलिक मटेरियल पढ़ा। रायपुर से ही पढ़ाई भी की।

पूजा ने बताया कि वो मगरलोड से हैं घर में इंटरनेट का कवरेज ही नहीं। इंटरनेट चाहिए तो ऊपर छत पर जाना पड़ता है। फिर भी चयन में इसके लिए कोई बाधा नहीं आई। पूजा ने बताया कि उन्हें लगा कि सोशल मीडिया तो सबसे ज्यादा बाधक है पढ़ाई के लिए और तीन साल तक सोशल मीडिया देखा ही नहीं। उन्होंने कहा कि पहले दो अटेम्प खराब हुए लेकिन हिम्मत नहीं हारी। निगेटिव लोगों से दूर रही। पाजिटिविटी आपके अंदर है इसके लिए मसूरी जाकर मोटिवेशन नहीं लेना पड़ता, ऐसा मोटिवेशन टिकता नहीं है।

अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि जाब में हैं इसलिए समय मैनेज करना पड़ा। कोई जाब के साथ भी पढ़ाई कर सकता है। अक्षय पिल्लै ने कहा कि इंजीनियरिंग के सब्जेक्ट लेकर भी चयनित हुआ जा सकता है। कोई भी विषय हो, उसमें आपकी पकड़ मायने रखती है। दिव्यांजलि ने कहा कि यूपीएससी की तैयारी मैराथन दौड़ के जैसी है। इसमें सही रणनीति रखना बहुत जरूरी है।

 

कलेक्टर ने भी अपने अनुभव साझा किये- कार्यशाला में कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने भी अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि जिस तरह साढ़े तीन घंटे आप लोग लगातार धैर्य से आज टापर्स को सुन रहे हैं। कुछ वर्षों पहले मैंने भी ऐसे ही एक कार्यशाला अटेंड की थी जिसमें खड़े हुए साढ़े तीन घंटे टापर्स को सुना था। जहां आपके इंटेलीजेंस की सीमा होती है वहां से हार्डवर्क काम करना शुरू कर देता है।

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