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*लेख: छत्तीसगढ़िया अस्मिता की लड़ाई और अमित बघेल – एक क्रांतिकारी आवाज़*

छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से वीरता, बलिदान और अस्मिता की पूजा करने वाली रही है। यही वह भूमि है जहां सात-सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक ही परिवार से जन्मे। उसी वंश का एक और बेटा आज भी संघर्ष की लौ जलाए हुए है—अमित बघेल, जो 12 वर्षों से छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे हैं।

अमित बघेल जी सिर्फ किसी संगठन के प्रमुख नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सेवक, जल-जंगल-जमीन के रक्षक, और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के नेतृत्वकर्ता के रूप में जनता के बीच पहचान रखते हैं।

*मामला क्या है? अस्मिता की लड़ाई या किसी की भावना आहत?*

छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को कुछ लोगों द्वारा तोड़ने की घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश जगाया। यह सिर्फ एक प्रतिमा नहीं थी—यह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, जनमानस और गौरव का प्रतीक थी।

इसी घटना पर तुलनात्मक और विरोध दर्ज कराने के दौरान अमित बघेल जी ने कुछ बातें कही, जिनका उद्देश्य था—

बाहरी ताकतों द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का लगातार अपमान उजागर करना,

महतारी एवं छत्तीसगढ़ के देवी-देवताओं के सम्मान की बात उठाना,

और यह बताना कि छत्तीसगढ़िया समाज को अब जागना होगा।

लेकिन उनकी इन बातों को तोड़-मरोड़कर, संदर्भ से हटाकर, कुछ विशेष लोगों ने ऐसे पेश किया जैसे किसी समुदाय का अपमान किया गया हो। जबकि सत्य यह है कि उनके वक्तव्य का आशय किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को चोट पहुँचाना नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ महतारी और छत्तीसगढ़िया अस्मिता के पक्ष में खड़ा होना था।

परिणामस्वरूप 12 राज्यों में उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई—जो कि साफ दिखाता है कि मामला कानूनी कम, राजनीतिक और मानसिक दमन ज्यादा है।

*परदेसियावाद बनाम छत्तीसगढ़िया अस्मिता*

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों से एक बड़ी चिंता उभरकर सामने आ रही है—

बाहरी मानसिकता का बढ़ता दखल

जो छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा, देवी-देवताओं और परंपराओं पर लगातार चोट करता दिखाई देता है।

कभी छत्तीसगढ़ महतारी का अपमान,

कभी यहां की संस्कृति की खिल्ली,

कभी स्थानीय लोगों को दबाने की कोशिश,

और कभी छत्तीसगढ़िया आवाज़ को “उग्र” बताने का प्रयास।

यह सब मिलकर एक बात साफ कर देता है—छत्तीसगढ़ को उसकी अस्मिता से दूर करने की कोशिशें लगातार बढ़ी हैं।

अमित बघेल जैसे लोग इस परदेसियावादी सोच के खिलाफ खड़े हैं।

और यही वजह है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहाl

*छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का उद्देश्य क्या है?*

छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का लक्ष्य है—

छत्तीसगढ़ महतारी की इज्जत की रक्षा,

जल-जंगल-जमीन पर छत्तीसगढ़िया हक,

भाषा-संस्कृति का संरक्षण,

बाहरी दखल और सांस्कृतिक प्रदूषण का विरोध,

और हर छत्तीसगढ़िया को अस्मिता के लिए खड़ा करना।

क्रान्ति सेना हिंसा का नहीं—चेतना, संगठन और प्रतिरोध का मार्ग अपनाती है।

यह आंदोलन नहीं, आंदोलनशील पहचान,

*क्या अमित बघेल दोषी हैं? नहीं—वे छत्तीसगढ़ की आवाज़ हैं*

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कानून अपना काम करेगा, जहां FIR है वहां प्रक्रिया चलेगी।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अमित बघेल का आशय गलत था।

उन्होंने कोई धर्मविरोधी टिप्पणी नहीं की,

किसी समुदाय को नीचा दिखाने का उद्देश्य नहीं था,

उन्होंने सिर्फ तुलना के आधार पर विरोध की तीव्रता दिखाने की कोशिश की।

उनके शब्द अस्मिता के लिए थे, न कि किसी की भावना आहत करने के लिए।

*छत्तीसगढ़ियों के लिए संदेश – समय है जागने का*

यह लड़ाई सिर्फ अमित बघेल की नहीं।

यह लड़ाई हर उस छत्तीसगढ़िया की है जो अपनी संस्कृति, भाषा और मान-सम्मान से प्यार करता है।

हमें यह समझना होगा कि—

जब महतारी का अपमान होता है, हम सबका अपमान होता है।

जब छत्तीसगढ़िया संस्कृति पर चोट होती है, हम सब घायल होते हैं।

और जब कोई छत्तीसगढ़िया अपने अधिकार की बात करता है, उसे चुप कराने का प्रयास किया जाता है।

अब समय है कि हम एकजुट हों,

परदेसियावादी सोच का शांतिपूर्ण प्रतिरोध करें,

और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए खड़े हों।

अमित बघेल सिर्फ एक नाम नहीं—

वे उस भावना का प्रतीक हैं जो हर छत्तीसगढ़िया के दिल में है।

उन पर की गई FIRs असल मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास हैं।

सच्चाई यह है कि—

वे अपराधी नहीं, अस्मिता के प्रहरी हैं।

और जब तक छत्तीसगढ़ है,

छत्तीसगढ़ महतारी है,

तब तक उसकी आवाज़ दबाई नहीं जा सकती। जोहार छत्तीसगढ़।।