छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की लोक कला जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे लगभग 70 वर्ष की थीं और पिछले कई सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थीं। डॉक्टरों के लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
तीजन बाई का जन्म दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था। बचपन से ही उन्हें महाभारत की कथाओं और पंडवानी गायन में गहरी रुचि थी। उन्होंने बहुत कम उम्र में मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया। उस समय पंडवानी की एक शैली में महिलाओं का प्रदर्शन करना सामान्य नहीं माना जाता था, लेकिन उन्होंने सामाजिक परंपराओं को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
अपनी दमदार आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली के कारण तीजन बाई ने पंडवानी को गांवों की चौपाल से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने भारत के अलावा यूरोप, एशिया और कई अन्य देशों में भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीता। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को दुनिया भर में नई पहचान दिलाई।
भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।
उनके निधन की खबर सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कई नेताओं, कलाकारों तथा साहित्यकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। हजारों लोगों ने नम आंखों से अपनी प्रिय लोक कलाकार को अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा में कलाकार, साहित्यकार, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए।
डॉ. तीजन बाई का जाना भारतीय लोक कला के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। हालांकि उनकी आवाज़, उनकी प्रस्तुतियां और पंडवानी के प्रति उनका समर्पण हमेशा देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे।
कैमरे के सामने समापन:
“पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाने वाली महान लोक कलाकार डॉ. तीजन बाई आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला और उनकी विरासत सदैव अमर रहेगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।”
