रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत वर्षों पहले काम पूरा कर चुके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के कई ठेकेदार अब भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। भुगतान में लगातार हो रही देरी से नाराज ठेकेदारों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे नीर भवन का घेराव करेंगे।
ठेकेदारों का आरोप है कि उन्होंने सरकार के निर्देशों के अनुसार समय पर पाइपलाइन बिछाने, पानी की टंकियां बनाने और ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण पूरा कर दिया। कई गांवों में इन योजनाओं के माध्यम से लोगों को नियमित पेयजल भी मिल रहा है, लेकिन कार्य पूर्ण होने के वर्षों बाद भी उन्हें उनकी मेहनत का भुगतान नहीं मिल सका है।
ठेकेदारों का दावा है कि जल जीवन मिशन के लिए भारत सरकार से पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद भुगतान प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। उनका आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव एवं जल जीवन मिशन के मिशन संचालक मोहम्मद कैसर अब्दुल हक और अतिरिक्त मिशन संचालक ओंकेश चन्द्रवंशी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण लंबित मामलों का समय पर समाधान नहीं हो पाया।
ठेकेदारों का कहना है कि मिशन संचालकों की जिम्मेदारी केवल फाइलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि जिला प्रशासन, पंचायतों और बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर पूर्णता प्रमाण-पत्र, विद्युत कनेक्शन और अन्य तकनीकी बाधाओं का समयबद्ध निराकरण कराना भी है। उनका आरोप है कि इस दिशा में प्रभावी पहल नहीं होने के कारण भुगतान वर्षों से अटका हुआ है।
आर्थिक संकट झेल रहे कई ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने कार्य पूरा करने के लिए बैंकों से ऋण लिया और ऊंची ब्याज दरों पर धन की व्यवस्था की थी। भुगतान नहीं मिलने से अब वे भारी कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। उनका कहना है कि समय पर राशि नहीं मिलने से कई ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है और नए सरकारी कार्यों में भाग लेना भी मुश्किल हो रहा है।
ठेकेदारों का यह भी आरोप है कि भुगतान में देरी से जल जीवन मिशन की गति पर भी असर पड़ा है। उनका कहना है कि यदि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होती और जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग की जाती, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।
अब ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान की स्पष्ट समय-सीमा घोषित नहीं की गई तो वे नीर भवन का घेराव कर व्यापक प्रदर्शन करेंगे। साथ ही उनकी मांग है कि जिन ठेकेदारों ने कार्य पूरा कर दिया है, उनका भुगतान तत्काल जारी किया जाए और भुगतान में हुई देरी के कारणों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
