रायपुर स्थित सालेम इंग्लिश स्कूल प्रबंधन ने प्रभारी प्राचार्य रुपिका लॉरेंस पर लगाए जा रहे धर्मांतरण के आरोपों को पूरी तरह से गलत, निराधार और सुनियोजित साजिश बताया है।
प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ स्वार्थी तत्व विद्यालय में चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपए के गबन की जांच से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के गंभीर आरोप गढ़ रहे हैं।
प्रबंधन का कहना है कि हाल ही में कुछ कर्मचारियों (आया एवं अन्य वर्ग) के माध्यम से पुलिस में की गई शिकायत का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि उनका मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह शिकायत संस्था की छवि खराब करने के उद्देश्य से तैयार कराई गई प्रतीत होती है।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी, जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर जैसी गंभीर शिकायतें लंबित हैं, जिनकी जांच जारी है। प्रबंधन के अनुसार, इसी जांच से बचने के लिए भ्रामक वातावरण बनाया जा रहा है।
📌 प्रबंधन ने दिए ये स्पष्टीकरण:
• कर्मचारियों के पीएफ से संबंधित भुगतान पहले ही किया जा चुका है।
• 1 दिसंबर 2025 से जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त प्रशासक और डीईओ के माध्यम से कर्मचारियों को नियमित वेतन दिया जा रहा है।
• वहीं, प्रभारी प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन कथित रूप से जानबूझकर रोका गया, जबकि डीईओ द्वारा कई बार निर्देश जारी किए गए थे।
इसके अलावा, 27 मार्च 2026 को सीडीबीई (CDBE) का चुनाव विधिवत रूप से संपन्न हुआ, जिसके बाद नई समिति का गठन किया गया। नई समिति ने वित्तीय मामलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति भी बनाई है।
प्रबंधन का आरोप है कि जांच से घबराकर कुछ लोग झूठे आरोपों और भ्रामक प्रचार का सहारा ले रहे हैं।
अंत में, स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों, आम नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और सत्य सामने आने तक संयम बनाए रखें।
साथ ही, संस्था ने स्पष्ट किया है कि मानहानि और झूठी शिकायतों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है।
