बारनवापारा की समृद्ध जैव विविधता का अनोखा नजारा
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को एक दुर्लभ और आकर्षक वृक्षवासी गिलहरी दिखाई दी, जिसने प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के बीच खास उत्साह पैदा कर दिया। इस दुर्लभ जीव की पहचान स्थानीय गाइड विकेश कुमार ध्रुव द्वारा की गई, जिसकी सराहना पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने की।
जानकारी के अनुसार तस्वीर में दिखाई देने वाला जीव भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel) है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Ratufa indica कहा जाता है। यह प्रजाति सामान्य गिलहरियों की तुलना में काफी बड़ी होती है और अपनी लंबी घनी पूंछ तथा आकर्षक रंगों के कारण आसानी से पहचानी जाती है। इसके शरीर का ऊपरी भाग गहरे कत्थई और काले रंग का होता है, जबकि गर्दन और पेट का हिस्सा हल्के क्रीम रंग का दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति घने जंगलों में ऊंचे पेड़ों पर रहना पसंद करती है और बहुत कम जमीन पर उतरती है। इसकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बारनवापारा अभ्यारण्य में इस प्रकार के दुर्लभ जीवों का दिखना इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता
दर्शाता है। इससे इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में ऐसे अनोखे वन्यजीव देखने का अवसर मिलता है।
वन्यजीव फोटोग्राफर पिनकी बनर्जी, रायपुर ने कहा कि बारनवापारा की जंगल सफारी के दौरान ऐसे खूबसूरत और दुर्लभ पलों को कैमरे में कैद करना किसी भी प्रकृति प्रेमी के लिए बेहद यादगार अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने गाइड विकेश कुमार ध्रुव की सजगता और अनुभव की भी सराहना की। घने पेड़ों और पत्तों के बीच छिपे ऐसे दुर्लभ जीवों को पहचानना और पर्यटकों को दिखाना एक कुशल गाइड की पहचान माना जाता है।
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