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दिलजीत दोसांझ की मूवी सतलुज zee5 पे रिलीज़ की गयी कुछ लोग देखे कुछ नहीं देख पाए २४ घंटे के अंदर अंदर ही इस फिल्म को zee5 से हटा दिया गया , आखिर किस बात का डर है लोगो में कौन है वो लोग जो पंजाब में हुए इस 1995 की घटना को लोगो के सामने नहीं आने देना चाहते जिसे शायद दुनिया की 95 प्रतिसत लोग जानते नहीं है.
अगर कश्मीर में हुए दर्द को दुनिया के सामने फिल्म के दवरा लाया जा सक्ता है तो फिर सतलुज फिल्म में क्या ताक़िफ़ हो सकती है, क्यों पंजाब पुलिस की बर्बरता को दुनिया के सामने लाने से रोका जा रहा है कौन है वो लोग जो ये नहीं चाहते की ये सच दुनिया के सामने आए की कैसे 25000 लोग को बिना किसी गलती के मर दिया गया और परिवार की जानकारी होते हुए भी उन्हें लावारिस बता दिया गया जिनका अंतिम संस्कार भी करने उनके परिवार वालो को नहीं मिला , और जब इन सब को दुनिया के सामने लेन के लिए कोई खरा होता है तो पुलिस और नेताओ दवरा उसे प्रताड़ित किया जाता है और फिर मार दिया जाता है, ऐसा सच दुनिया के सामने लाने के लिए हिम्मत चाहिए,

कोई तो है ऐसा जो नहीं चाहता की दुनिया सच जाने, क्यों सतलुज की आवाज दबाई जा रही है 1995 में जो हुआ ये पुलिस और नेताओ की मिली भगत थी या पुलिस केवल नेताओ की कठपुतली थे ?