नई दिल्ली:
देश की राजनीति में अब Gen-Z (करीब 18–29 वर्ष आयु वर्ग) सबसे महत्वपूर्ण मतदाता समूहों में गिनी जा रही है। राजनीतिक दल युवाओं को अपने पक्ष में करने के लिए रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, डिजिटल अवसर और कौशल विकास जैसे मुद्दों पर लगातार फोकस कर रहे हैं।
हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है। इसके बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने छात्र-युवा वर्ग से संवाद बढ़ाया और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों में युवा मतदाताओं का रुझान कई राज्यों और राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि किस दल को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। चुनावी नतीजे अंततः स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, गठबंधनों और मतदाताओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेंगे।
