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नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। यह इमारत छात्रों के लिए PG के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी और हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत एवं निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था। जांच में बेसमेंट में पानी भरने, पुराने ढांचे और कथित अनधिकृत निर्माण जैसे कई पहलुओं पर सवाल उठ रहे हैं।

हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया। घटना ने दिल्ली में पुराने मकानों, PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी पुरानी और बहुमंजिला इमारत में छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिली? क्या समय-समय पर इसका स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट हुआ था?

बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य की अनुमति किसने दी? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ था तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

हादसे के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इमारत मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच की मांग उठ रही है।

यह हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने की घटना नहीं, बल्कि पुराने भवनों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा सवाल है।

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