रायगढ़ जिले में नाबालिग किशोरी के अपहरण से जुड़े मामले में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश देवेंद्र साहू ने आरोपी करन डोम को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 6 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला कोतरा रोड थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार नाबालिग किशोरी घर से दुकान जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन काफी समय तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि आरोपी करन डोम, जो जशपुर जिले का रहने वाला है, किशोरी के संपर्क में मोबाइल फोन के जरिए आया था। आरोपी ने दोस्ती बढ़ाने के बाद उसे शादी और बेहतर भविष्य का झांसा दिया। इसके बाद वह किशोरी को अपने साथ लेकर चला गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी पहले किशोरी को कुनकुरी लेकर गया और बाद में ओडिशा के पुरी में कई दिनों तक अपने साथ रखा। इस दौरान परिजन लगातार उसकी तलाश करते रहे। बाद में आरोपी के एक रिश्तेदार के माध्यम से किशोरी के परिजनों को उसकी जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए किशोरी को सुरक्षित बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने माना कि आरोपी को पीड़िता के नाबालिग होने की जानकारी थी, इसके बावजूद उसने उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर गंभीर अपराध किया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद नारायण दुबे ने पैरवी की।
