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वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। युद्ध जैसे हालात शुरू होने के करीब 86 दिन बाद भी दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और सामरिक नियंत्रण को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक बातचीत में सबसे बड़ा विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि ईरान आर्थिक प्रतिबंध हटाने और अपने परमाणु अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है।

वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस पूरे विवाद का अहम केंद्र बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भी चिंता बढ़ गई है। कई देशों को आशंका है कि यदि स्थिति और बिगड़ी तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। अमेरिका को आशंका है कि ईरान परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान का आरोप है कि अमेरिका बार-बार समझौतों और प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता रहा है।

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और कूटनीतिक दबाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस वार्ता पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक दबाव दोनों बढ़ सकते हैं।