
देश का युवा रोजगार की तलाश में भटक रहा है। लाखों शिक्षित युवक-युवतियां प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी की प्रतीक्षा में अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष गुजार रहे हैं। लेकिन ना उन्हें रोजगार मिल रहा है ना व्यवसाय के लिए कोई साधन, देश के युवा की परिस्थिति ऐसी हो गयी है की “आगे कुआ पीछे खाई ”
पहले उन्हें पढाई के लिए सालो साल मेहनत करनी परती है, पैसा अपना वक़्त भूख प्यास मस्ती सब छोर के पढाई में डूबे रहते है, दूर दूर सहरो में एग्जाम के लिए जाते है लेकिन कभी एग्जाम केन्सिल तो कभी एग्जाम के बाद पेपर लीक हो जाता है और उस विषय में किसी भी बैठक में किसी तरह की चर्चा तक नहीं की जाती है,
बच्चो के भविष्य के साथ जैसे खेलवार किया जा रहा हो लाखो बच्चे हर साल पढाई और एग्जाम के लिए कितनी मेहनत करते है और पेपर लीक और एग्जाम केन्सिल के चलते उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाती है जिसकी वजह से कितने बच्चे आत्महत्या तक कर लेते है और अगर इन सब ड्रामो के बाद भी अगर कुछ बच्चे अगर एग्जाम निकल भी ले तो सरकारी नौकरी के इंतजार में बेरोजगार बैठे रहते है सालो साल तक न कोई वैकेंसी आती है न उनको काम मिल पाती है ऐसे में किसी भी प्राइवेट नौकरी करनी परती जिस में उनकी योग्यता के अनुसार न सेलेरी मिल पाती है न उनकी निजी जरूरते पूरी हो पाती है , ये युवा जिन्हे भारत का आने वाला भविष्य बोला जाता है उनके भविष्य के बारे सरकार की न कोई प्रतिक्रिया है न कोई चिंता, ना ही इनकी परिश्थिति को लेकर किसी न्यूज़ चेंनल पे चर्चा होती है.
