रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत पुराने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की व्यवस्था लागू है। इसी प्रक्रिया के तहत सड्डू निवासी तनवीरुद्दीन ख्वाजा उर्फ अफरोज ने अपनी गाड़ी के लिए HSRP नंबर प्लेट का ऑनलाइन आवेदन किया।
बताया गया कि आवेदन के बाद दलदलसिवनी बिजली ऑफिस के सामने स्थित परिवहन सुविधा केंद्र से वाहन की दोनों नंबर प्लेट तैयार होकर मिल गईं। उपभोक्ता का आरोप है कि नियमानुसार नंबर प्लेट को वाहन पर निर्धारित तरीके से लॉकिंग सिस्टम के माध्यम से लगाना था, लेकिन सुविधा केंद्र संचालक ने प्लेट वाहन में लगाने के बजाय दोनों प्लेट उनके हाथ में सौंप दीं।
उपभोक्ता के अनुसार, केंद्र संचालक ने उन्हें कहीं और से नंबर प्लेट लगवाकर उसकी फोटो भेजने को कहा। इसके बाद फोटो ऑनलाइन अपलोड करने और आगे की प्रक्रिया पूरी होने की बात कही गई। साथ ही यह भी बताया गया कि बाद में आरसी उनके घर पहुंच जाएगी।
मामले में उपभोक्ता का कहना है कि यदि HSRP लगाने की प्रक्रिया में वाहन पर प्लेट फिट करना निर्धारित सेवा का हिस्सा है, तो सुविधा केंद्र द्वारा प्लेट हाथ में देकर उपभोक्ता को स्वयं लगवाने के लिए कहना सवाल खड़े करता है।
वहीं, सुविधा केंद्र संचालक की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि नंबर प्लेट लगाने का काम वे निशुल्क सेवा के रूप में करते हैं और इसके लिए उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिलता।
अब सवाल यह है कि HSRP की फीस लेने के बाद उपभोक्ता को निर्धारित फिटिंग सुविधा देना किसकी जिम्मेदारी है और यदि फिटिंग सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई तो उपभोक्ता से ली गई राशि में संबंधित सेवा का क्या प्रावधान शामिल है। मामले में परिवहन विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश और जांच की मांग उठ रही है।

