नई दिल्ली। आज उत्तर प्रदेश का मोदीनगर एक प्रमुख औद्योगिक शहर के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसकी कहानी एक ऐसे कारोबारी की मेहनत और दूरदृष्टि से जुड़ी है, जिसने बेहद सीमित पूंजी से अपना सफर शुरू किया था। उद्योगपति गुजरमल मोदी 1932 में महज ₹400 लेकर अपने नए कारोबारी अवसर की तलाश में निकले थे।
दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित बेगमाबाद को उन्होंने अपने औद्योगिक प्रयोग के लिए चुना। यहां उन्होंने जमीन हासिल कर 1933 में इंग्लैंड से लाई गई मशीनों की मदद से चीनी मिल स्थापित की। यही पहल आगे चलकर उस इलाके के औद्योगिक विकास की नींव बनी और बेगमाबाद का नाम मोदीनगर के रूप में पहचान बनाने लगा।
चीनी मिल से शुरू हुआ औद्योगिक विस्तार
गुजरमल मोदी का कारोबार केवल चीनी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने धीरे-धीरे वनस्पति तेल, साबुन, बिस्किट, खाद्य उत्पाद, तेल, कपड़ा, पेंट, टॉर्च, स्टील और अन्य क्षेत्रों में उद्योग खड़े किए। 1939 में वनस्पति उत्पादन और उसके बाद साबुन निर्माण जैसे कारोबार ने उनके औद्योगिक विस्तार को नई दिशा दी।
उनकी खासियत यह थी कि वे एक उद्योग से निकलने वाले संसाधनों को दूसरे कारोबार में इस्तेमाल करने के अवसर तलाशते थे। इसी सोच के चलते उनका कारोबारी नेटवर्क लगातार बढ़ता गया और मोदीनगर में कई तरह की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं।
सिर्फ कारखाने नहीं, पूरा शहर विकसित किया
गुजरमल मोदी की पहचान केवल उद्योगपति के तौर पर नहीं बनी। मोदीनगर में उन्होंने उद्योगों के साथ-साथ सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और कर्मचारियों के लिए आवास जैसी व्यवस्थाओं ने इस क्षेत्र को एक औद्योगिक टाउनशिप का रूप देने में मदद की।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान मोदीनगर की स्थापना 1933 में उद्योगपति गुजरमल मोदी ने की थी और इस क्षेत्र का नाम बाद में मोदीनगर हुआ।
सम्मान भी मिला
औद्योगिक विकास और सामाजिक कार्यों के चलते गुजरमल मोदी को ‘राय बहादुर’ की उपाधि मिली। बाद में भारत सरकार ने उन्हें 1968 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
₹400 से शुरू होकर बना बड़ा कारोबारी साम्राज्य
गुजरमल मोदी का सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कारोबार की शुरुआत बड़ी पूंजी से ही हो, यह जरूरी नहीं। ₹400 से शुरू हुई उनकी यात्रा ने आगे चलकर एक बड़े औद्योगिक समूह का रूप लिया और जिस बेगमाबाद में उन्होंने अपनी पहली बड़ी औद्योगिक पहल की थी, वही क्षेत्र मोदीनगर के नाम से जाना जाने लगा।
