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रायपुर, 15 मई 2026। Aam Aadmi Party छत्तीसगढ़ इकाई ने प्रदेश में उभर रहे खाद संकट, नई कृषि नीतियों और किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने कहा कि खरीफ सीजन से पहले किसानों को खाद उपलब्ध कराने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय झा, प्रदेश प्रवक्ता जयदीप खनूजा, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ और शिव शर्मा ने कहा कि प्रदेशभर की सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की कमी लगातार सामने आ रही है। किसानों को खाद लेने के लिए पंजीयन, टोकन और राजस्व कार्यालयों की जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी हो रही है।

AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों को कम खाद उपलब्ध कराने की नीति अपना रही है। उनका कहना है कि पहले सहकारी समितियों के माध्यम से 60 प्रतिशत नगद और 40 प्रतिशत उर्वरक उपलब्ध कराया जाता था, लेकिन अब इसे बदलकर 70:30 कर दिया गया है। पार्टी का दावा है कि इस बदलाव से किसानों को समितियों से कम खाद मिलेगा और उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर उर्वरक खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

पार्टी नेताओं ने प्रति एकड़ खाद की मात्रा कम किए जाने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि यदि किसानों को केवल सीमित मात्रा में यूरिया और डीएपी दिया जाएगा, तो फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्षों तक अधिक उत्पादन के नाम पर किसानों को रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया, लेकिन अब अचानक जैविक खेती की ओर बढ़ने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि इसके लिए आवश्यक संसाधन और वैकल्पिक व्यवस्था अभी उपलब्ध नहीं है।

AAP ने यह भी कहा कि छोटे और सीमांत किसान पहले से ही कर्ज, महंगी खेती और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में खाद कटौती और नई वितरण व्यवस्था किसानों की आर्थिक परेशानियों को और बढ़ा सकती है। पार्टी ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से जवाब मांगते हुए कहा कि यदि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहती है तो किसानों को आर्थिक सहायता, प्रोत्साहन राशि और वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

पार्टी की प्रमुख मांगें

* किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
* खाद वितरण में लागू नई पंजीयन और टोकन व्यवस्था समाप्त की जाए।
* प्रति एकड़ खाद की मात्रा में की गई कटौती वापस ली जाए।
* नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए।
* जैविक खेती लागू करने से पहले किसानों को विशेष आर्थिक सहायता पैकेज दिया जाए।
* सहकारी समितियों में खाद वितरण व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।

पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो किसानों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।