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गरियाबंद। 4 अक्टूबर 2024 को वाहन जांच के दौरान महेश बस की डिक्की में चावल की बोरियों के बीच से करीब 65 किलो गांजा बरामद होने के मामले में बस परिवहन कर्मचारी संगठन और संपूर्ण छत्तीसगढ़ ड्राइवर एसोसिएशन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

संगठनों का आरोप है कि चावल की पांच बोरियां एक एजेंट के माध्यम से रायपुर भेजी गई थीं। उनका दावा है कि बोरियां बुक कराने वाले एजेंट, कथित गांजा सप्लायर और रायपुर में खेप प्राप्त करने वाली पार्टी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय बस के चालक और परिचालक को ही मामले में आरोपी बना दिया गया।

संगठनों के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई में यह आरोप लगाया गया कि बस चालक और परिचालक ने गांजा खरीदा और उसे रायपुर ले जाकर बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे थे। संगठन इस दावे को गलत बताते हुए चालक और परिचालक को निर्दोष बता रहा है।

संगठन ने गरियाबंद थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मामले में वास्तविक आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई और बस के चालक-परिचालक को आरोपी बनाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बस परिवहन कर्मचारी संगठन और संपूर्ण छत्तीसगढ़ ड्राइवर एसोसिएशन ने गरियाबंद प्रशासन को मुख्य आरोपियों को पकड़कर कार्रवाई करने, बस चालक-परिचालक को रिहा करने और जब्त बस को छोड़ने की मांग की है।

संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर गरियाबंद जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ में बसों का संचालन प्रभावित किया जा सकता है। संगठन के अनुसार, चालक वाहन चलाना बंद कर गरियाबंद पहुंचेंगे और चक्काजाम कर आंदोलन करेंगे।

संगठन ने कहा है कि चालक-परिचालक की रिहाई होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है।