रायपुर। शिवसेना (UBT) छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल सिंह परिहार ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र, राज्य, समाज, संस्कृति और व्यक्ति की पहचान का महत्वपूर्ण आधार है।
राहुल सिंह परिहार के अनुसार, प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ उसे समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराना भी था। उन्होंने कहा कि समय के साथ भारतीय शिक्षा के मूल स्वरूप में बदलाव आया, जिसके कारण समाज में अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के प्रति उदासीनता बढ़ी है।
उन्होंने शिक्षा में बढ़ते स्वार्थ पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा सभी का अधिकार है, लेकिन इसे केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित कर देना इसके मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना होना चाहिए।
परिहार ने ब्रिटिश शासनकाल की शिक्षा नीतियों और थॉमस बैबिंगटन मैकाले की भूमिका का उल्लेख करते हुए भारतीय समाज को मानसिक गुलामी की सोच से बाहर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीयों को अपनी भाषा, संस्कृति, समाज और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति सम्मान बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐसे मूल्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो व्यक्ति के चरित्र निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दें।
