नई दिल्ली। चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य तकनीक और आधुनिक युद्ध क्षमताएं भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए नई चुनौतियां पेश कर रही हैं। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और आधुनिक कमांड नेटवर्क भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
ITBP के DG शत्रुजीत कपूर के नाम से सामने आए बयान में आधुनिक सैन्य तकनीक की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया गया है। हालांकि, इस बयान के मूल स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चीन ने 2015-16 के दौरान अपनी सेना में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए थे। इसके तहत वेस्टर्न थिएटर कमांड का गठन किया गया, जो भारत से लगी सीमा सहित चीन के पश्चिमी क्षेत्र की सैन्य गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है। चीन ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए नेटवर्क आधारित युद्ध, निगरानी और तकनीकी प्रणालियों पर भी जोर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालय जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भविष्य के सैन्य अभियानों में केवल सैनिकों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी। ड्रोन स्वार्म, सटीक निगरानी, सुरक्षित संचार और दुश्मन के कमांड नेटवर्क को बाधित करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत के सामने स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने की चुनौती भी है। ड्रोन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में घरेलू विनिर्माण, अनुसंधान और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना अहम है।
1962 के भारत-चीन युद्ध का अनुभव आज भी सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। बदलते तकनीकी दौर में भारत के लिए आधुनिक उपकरणों, बेहतर समन्वय और समय रहते रणनीतिक तैयारी पर ध्यान देना जरूरी है।
नोट: ITBP के DG के नाम से दिए गए विशिष्ट बयान और चीन से संबंधित कुछ तकनीकी दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
