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बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री Mangal Pandey को नई कैबिनेट में जगह नहीं मिलने पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई सूची में उनका नाम शामिल नहीं होने से पार्टी के अंदर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा ने इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को मौका दिया है। इसी रणनीति के तहत कुछ पुराने मंत्रियों को बाहर रखा गया, जिनमें मंगल पांडे, सुरेंद्र मेहता और नारायण प्रसाद के नाम प्रमुख हैं।

मंगल पांडे पहले बिहार सरकार में स्वास्थ्य एवं कानून मंत्री रह चुके हैं और भाजपा संगठन में लंबे समय से प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वे बिहार भाजपा अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उन्हें कैबिनेट से बाहर रखना केवल संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि पार्टी भविष्य में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गृह मंत्री Amit Shah द्वारा मंगल पांडे से गर्मजोशी से मुलाकात करने की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं। इससे यह संकेत माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब भी उन्हें महत्वपूर्ण नेता मानता है।

नई कैबिनेट में भाजपा को 15 मंत्री पद मिले हैं, जबकि कई युवा और नए नेताओं को पहली बार मौका दिया गया है। इसे 2026 के राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।