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रायपुर, 15 मई 2026। भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल (BJMTUC) ने देश में दिहाड़ी मजदूरों के बीच बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि बेरोज़गारी, महंगाई, अस्थिर आय और बढ़ता आर्थिक दबाव अब केवल आर्थिक समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि यह मजदूर वर्ग के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।

BJMTUC के कार्यकर्ताओं ने बताया कि हाल ही में सामने आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वालों में बड़ी संख्या दिहाड़ी मजदूरों की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्महत्या करने वाले हर तीन लोगों में से लगभग एक व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर वर्ग से जुड़ा हुआ पाया गया।

संगठन का कहना है कि अस्थायी रोजगार, कम आय, बढ़ता कर्ज और परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ मजदूरों पर लगातार मानसिक दबाव बना रहा है। निर्माण कार्य, फैक्ट्री, ठेकेदारी और दैनिक मजदूरी से जुड़े लाखों मजदूर ऐसे हैं जिनकी आय पूरी तरह रोज़ मिलने वाले काम पर निर्भर करती है। काम बंद होने या बीमारी जैसी स्थिति में उनके सामने परिवार चलाने और भोजन की व्यवस्था का संकट खड़ा हो जाता है।

BJMTUC ने कहा कि आर्थिक विकास के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर मजदूरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई राज्यों में समय पर वेतन नहीं मिलना, कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और सरकारी योजनाओं तक सीमित पहुंच जैसी समस्याएँ लगातार सामने आ रही हैं।

संगठन के अनुसार लंबे समय तक आर्थिक तनाव रहने से व्यक्ति अवसाद, चिंता और निराशा का शिकार हो सकता है। मजदूर वर्ग में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहद सीमित है और जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश लोग मदद लेने से भी बचते हैं।

भारतीय जनता मजदूर ट्रेड यूनियन काउंसिल ने सरकार से मांग की है कि दिहाड़ी मजदूरों के लिए स्थायी रोजगार, न्यूनतम आय सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत किया जाए। संगठन का कहना है कि मजदूर वर्ग को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देना समय की बड़ी आवश्यकता है।