अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। तेल कंपनियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में ईंधन महंगा हो सकता है।
हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखी गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है।
अगर पेट्रोल-डीजल महंगे होते हैं, तो परिवहन लागत बढ़ने के कारण रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। ट्रांसपोर्ट, कृषि और छोटे कारोबारों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। कई राज्यों में पहले से ही ईंधन की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई हैं।
सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार और टैक्स ढांचे के आधार पर आगे का फैसला लेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आई, तो आने वाले हफ्तों में जनता को महंगाई का अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ सकता है।
