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रायपुर। छत्तीसगढ़ में जर्किन और डब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर लगाए गए प्रशासनिक प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। Aam Aadmi Party के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष Devlal Nareti ने इस आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि इससे किसानों, ग्रामीणों और छोटे व्यवसायियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, पानी के पंप और अन्य कृषि उपकरण अक्सर खेतों या दूरस्थ स्थानों पर संचालित होते हैं। कई बार मशीनों तक सीधे पेट्रोल पंप पहुंचना संभव नहीं होता, ऐसे में किसान जर्किन या अन्य सुरक्षित पात्रों में ईंधन ले जाकर काम करते हैं। इस व्यवस्था पर रोक लगाने से खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

डीजल जनरेटर उपयोगकर्ताओं की बढ़ी चिंता

पार्टी ने यह भी कहा कि शहरों और कॉलोनियों में बड़ी संख्या में डीजल जनरेटर (DG सेट) उपयोग में लाए जाते हैं, जिनके लिए डीजल की नियमित आवश्यकता होती है। बिजली कटौती की स्थिति में बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट और अन्य जरूरी सेवाएं इन्हीं जनरेटरों पर निर्भर रहती हैं। ऐसे उपकरणों को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं होने के कारण लोग डब्बों या जर्किन में ईंधन खरीदते हैं।

निर्माण कार्यों पर भी असर की आशंका

निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली मिक्सचर मशीन और अन्य उपकरण भी डीजल से चलते हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि नए प्रतिबंध के कारण कंस्ट्रक्शन सेक्टर के कई छोटे-बड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

आम आदमी पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए किसानों, ग्रामीणों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को पहचान और आवश्यक जानकारी के आधार पर सीमित मात्रा में जर्किन या सुरक्षित पात्रों में पेट्रोल-डीजल उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाए।

पार्टी का कहना है कि जनता पहले से ही बढ़ती ईंधन कीमतों का दबाव झेल रही है, ऐसे में इस तरह के प्रतिबंध आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं।