रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेकेदारों के अधीन काम करने वाले श्रमिकों के वेतन में कथित अनियमितताओं और धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आयोग के ईस्ट इंडिया जोन अध्यक्ष शब्बीर अहमद सहित अन्य पदाधिकारियों ने श्रम विभाग को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कुछ ठेका श्रमिकों का वेतन बढ़ाकर दिखाया जाता है, लेकिन भुगतान के बाद बढ़ी हुई राशि का कुछ हिस्सा वापस देने के लिए कथित तौर पर दबाव बनाया जाता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि राशि लौटाने से इनकार करने वाले श्रमिकों को नौकरी से निकालने या भविष्य में काम नहीं देने की धमकी दिए जाने की आशंका है। आयोग के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक रोजगार छिनने के डर से ऐसी परिस्थितियों का सामना करने को मजबूर हो सकते हैं।
वेतन और बैंक रिकॉर्ड की जांच की मांग
आयोग ने संबंधित ठेकेदारों के वेतन रजिस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड, वेतन पर्चियों और बैंक भुगतान विवरण की जांच कराने की मांग की है। आयोग का कहना है कि दस्तावेजों की पड़ताल से वास्तविक वेतन भुगतान और राशि वापस लिए जाने के आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है।
श्रमिकों को सुरक्षा देने की मांग
शिकायत में श्रमिकों को संभावित दबाव, प्रताड़ना और नौकरी से हटाए जाने की कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग भी की गई है। आयोग ने श्रम विभाग से वेतन संबंधी शिकायतों की नियमित निगरानी करने और श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में श्रम कानूनों या निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आयोग के मुताबिक, यह मामला श्रमिकों की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। इसलिए शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
