z
हम समझदार हो रहे है या तकलीफो के गिरफ्तार हो रहे है
जिंदगी जी रहे है या जिंदगी से बेज़ार हो रहे है
चलो मान लेते है की तुम साथ हो मेरे ठीक है
मगर हम अपनी किस्मत के गिफ्तार हो रहे है
अभी सब ठीक था ये कल की बात है
आज देखो रिसते तार तार हो रहे है
झूठ और फरेब का मुखौटा लगा लिया सबने
अपने खून के रिसते भी शर्मसार हो रहे है
तकलीफ़ ये नहीं की चहरे बदल गए
दुख तो ये है हम सब समझ रहे समझदार हो रहे है
मिलती नहीं ख़ुशी अब झूठी तारीफ़ पे
जुमले अब सरेआम हो रहे है
एक जहाँ अब हम भी बसाएँगे जहाँ सच की चादर होगी
झूठे रिसते अब बेनक़ाब हो रहे है.
#इमोशन#फीलिंग्स#पोएट्री#
