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बहुत तकलीफ होती है देश के युवा की हालत देख के जिसमे हम जैसे आम इंसान कुछ नहीं कर सक्ते बस सिस्टम और गवर्नमेंट के हाथ की कठपुतली बन के रह गए है.

हाल ही में नीट का री-एक्साम के बाद सोशल मीडिया पे जो फोटो वीडियो सामने आ रहा है काफी भयानक और मार्मिक है ,एक सेकंड के लिए बच्चो की एंट्री पे रोक लगने के कारण बच्चो यहाँ तक की माता पिता की तकलीफो का कोई अंदाजा नहीं लगा सक्ता , रोते बिलखते बच्चे दूर दूर से आए माँ बाप की उम्मीदों पे पानी फेरती हमारी सिस्टम , क्या कहे कैसे तारीफ करे समझ में नहीं आ रहा,

एजुकेशन सिस्टम से बच्चो का विश्वास ख़तम होता दिख रहा है, और ये सिस्टम अपने ऊपर कभी दोष नहीं लेती, एडमिट कार्ड पे गलत सेण्टर का नाम आना सेंटर पर पहुंचने के बाद बच्चो बताया जाता है की गलत सेंटर है री-डौनलोड़ करो एडमिट कार्ड को और दूसरी बार दूसरा सेण्टर ऐसे में ऊर के बच्चे पहुंच नहीं सकते ऐसे में दोषी कौन है सिस्टम या बच्चे है।

कौन तय करेगा की इन सब का जिम्मेदार कौन है