सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में 2023 से जुड़े हिंसा मामलों की सुनवाई में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने सुझाव दिया है कि इन मामलों की रोजाना (day-to-day) सुनवाई के लिए विशेष अदालतें (Special Courts) बनाई जाएं, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मणिपुर हिंसा से जुड़े लगभग 3,000 मामलों में राज्य पुलिस की विशेष जांच टीमों (SIT) ने अब तक केवल करीब 10% मामलों की जांच पूरी की है। वहीं, CBI को सौंपे गए प्रमुख मामलों में अपेक्षाकृत अधिक प्रगति हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने CBI और SIT सहित सभी जांच एजेंसियों को लंबित मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि पीड़ितों को चार्जशीट की प्रतियां समय पर उपलब्ध कराई जाएं और न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
अदालत का मानना है कि इतने संवेदनशील मामलों में लंबी देरी से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसलिए विशेष अदालतों के माध्यम से नियमित सुनवाई कर मामलों का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया गया है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मणिपुर हिंसा के पीड़ित लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट संकेत दिया है कि इन मामलों में तेज और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
