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देश के कुछ अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर स्थित ड्यूटी-फ्री दुकानों में निकोटीन पाउच की बिक्री को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ ड्यूटी-फ्री आउटलेट्स पर अंतरराष्ट्रीय तंबाकू कंपनी द्वारा बनाए गए अलग-अलग फ्लेवर वाले निकोटीन पाउच बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इन उत्पादों की बिक्री भारतीय नियमों के अनुरूप है और क्या ड्यूटी-फ्री क्षेत्र को सामान्य घरेलू कानूनों से अलग माना जा सकता है।
इस मुद्दे पर दो प्रमुख पहलुओं पर चर्चा हो रही है। पहला, भारत में निकोटीन से जुड़े कुछ उत्पादों की बिक्री और वितरण विभिन्न नियमों और प्रतिबंधों के अधीन हैं। ऐसे में यह जानने की मांग उठ रही है कि ड्यूटी-फ्री दुकानों में इनकी बिक्री किन कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।
दूसरा पहलू स्वास्थ्य से जुड़ा है। चिकित्सा विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि निकोटीन एक अत्यधिक लत लगाने वाला पदार्थ है और इसके सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। इसी कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी इस विषय पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ड्यूटी-फ्री व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि ये दुकानें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सीमा शुल्क (कस्टम्स) क्षेत्र के भीतर संचालित होती हैं, इसलिए इन पर कुछ अलग नियम लागू होते हैं। वहीं, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी क्षेत्र को पूरी तरह कानून से बाहर नहीं माना जा सकता और यदि किसी मामले में भारतीय कानून लागू होता है तो संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करने के लिए अधिकृत रहती हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर कानूनी स्थिति, नियामकीय व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को लेकर चर्चा जारी है। इस विषय पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।
