रायपुर। खारून नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सीवर नेटवर्क पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। पुराने आधिकारिक नदी-एक्शन प्लान में चंदनीडीह, कारा और निमोरा में क्रमशः 75, 35 और 90 MLD क्षमता के STP का उल्लेख है। इन तीनों की कुल क्षमता 200 MLD है।
इसके बावजूद शहर के नालों से आने वाले सीवेज को लेकर सवाल बने हुए हैं। छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संबंधी एक सरकारी रिपोर्ट में भी रायपुर के 17 नालों के खारून नदी में मिलने और सीवर के अपर्याप्त conveyance network की समस्या का उल्लेख किया गया था।
मामले में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और खारून नदी से जुड़े प्रदूषण/अन्य मुद्दों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में भी कार्यवाही हुई है। हालांकि उपलब्ध NGT रिकॉर्ड में फरवरी 2026 की कार्यवाही मुख्य रूप से खारून और महानदी में कथित अवैध रेत खनन से संबंधित है, जिसमें तीन सदस्यीय संयुक्त समिति बनाकर छह सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई थी।
ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के बावजूद नदी तक पहुंचने वाले नालों के पानी की निगरानी और रोकथाम कितनी प्रभावी है। खारून नदी में हाल में बढ़े जलस्तर और बाढ़ जैसी स्थिति ने भी नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों को चर्चा में ला दिया है।
